webduniyahindi | मनमोहन सिंह हैं वाकई महान
1182
post-template-default,single,single-post,postid-1182,single-format-standard,ajax_fade,page_not_loaded,,qode-title-hidden,qode_grid_1300,hide_top_bar_on_mobile_header,qode-content-sidebar-responsive,qode-theme-ver-17.2,qode-theme-bridge,qode_header_in_grid,wpb-js-composer js-comp-ver-5.6,vc_responsive

मनमोहन सिंह हैं वाकई महान

मनमोहन सिंह हैं वाकई महान 

26 सितम्बर 2017 को देश के पूर्व प्रधान मंत्री श्री मनमोहन सिंह 85 वर्ष के हो गए ,एक बार दिल किया कि क्यों ना इस मौके पर एक बार इस शख्सियत के जीवन के उतार  चढ़ावों की विवेचना की जाये,उनका बचपन ,उनका परिवार ,उनकी शिक्षा ,उनकी जवानी ,उनका व्यव्हार  जाना जाये। मनमोहन सिंह का एक लम्बा प्रशासनिक और राजनैतिक जीवन रहा है फिर भी देश के अधिकांश लोग उनके बारे में न्यूनतम जानकारी रखते है, विषेशकर उनके अतीत के बारे में। उनके बारे में जानकारी प्राप्त करने पर पता चलता है कि वो निश्चित रूप से इस सदी के महान लोगो में से  एक हैं।

उनकी महानता तब और अधिक महसूस होती है जब उनके तुलना भारत के अन्य नेताओ और प्रधान मंत्रियों से होती है,एक पुराणी कहावत भी है कि छोटी बहु के नखरे देख कर ही बड़ी बहु की अच्छाइयां पता चलती है।

मनमोहन सिंह का जन्म 26 सितम्बर 1932 में पंजाब के गाह गांव में हुआ जो अब पंजाब में है।  उनका परिवार बहुत ही गरीब था ,उनके परिवार में दो टाइम के खाने के लाले थे ,लेकिन आज तक मनमोहन ने कभी भी अपने परिवार की गरीबी के दुहाई नहीं दी। जैसे तैसे बचपन कट रहा था कि ईश्वर ने इस मासूम की माँ छीनकर कर एक बड़ी सजा दे दी ,उनके सिर से माँ का साया उठ गया। उस नादान को ये भी नहीं पता था कि उससे क्या छीन लिया गया  है लेकिन कभी में उनके भाषण में किसी ने नहीं सुना होगा कि वो एक बिना माँ के बेटे थे। उनकी माँ की मौत के बाद उनका लालन पालन उनकी दादी में किया। मनमोहन थोड़ा समझने लगे थे तभी देश का विभाजन हो गया और उन्हें पाकिस्तान से अमृतसर आना पड़ा। मनमोहन एक बेहद बुरे बचपन से गुजरे जिसमे उन्होंने गरीबी का एहसास  ,माँ की मौत का दर्द और विभाजन का दँश झेला है लेकिन उन्होंने अपने बदनसीब बचपन के नाम पर कभी जनता से वोट नहीं माँगा।

मनमोहन सिंह को  बचपन से ही पढ़ाई में रूचि थी वो अक्सर अपनी कक्षा में अव्वल आते थे। अमृतसर में हिन्दू कॉलेज में उन्होंने दाखिला लिया। उन्होंने पंजाब यूनिवर्सिटी ,चंडीगढ़ से अर्थशास्त में स्नातक की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने केम्ब्रिज यूनिवर्सिटी और ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी से स्नातकोत्तर स्तर की पढ़ाई की। वहां से वापिस आकर उन्होंने पंजाब यूनिवर्सिटी और दिल्ली स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स में लेक्चरर के रूप में काम किया। उनकी शादी 1958 में हुई और तीन बेटियों के पिता बने। 1971 में भारतीय प्रशासनिक सेवा में शामिल हुए और वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय में आर्थिक सलाहकार के पद पर नियुक्त हुए और उसके बाद भारत सरकार में अनेक उच्च पदों पर काम किया ,वो शिक्षा और इकोनॉमिक्स के एक बड़े ज्ञाता रहे लेकिन उनके विचारों और व्यवहार में हमेशा एक नम्रता और सादगी रही। इसके बाद उनहोंने राजनीती की तरफ रुख किया

1991 देश में आर्थिक संकट चल रहा था ,उस समय पी.वी.नरसिम्हा भारत प्रधान मंत्री बने और उनकी सरकार में मनमोहन सिंह वित्त मंत्री बने। मनमोहन सिंह ने आर्थिक उदारीकरण के युग की शुरुआत की और बिगड़ती हुई अर्थ व्यवस्था को एक नई दिशा दी,व्यवसायों से लाइसेंस राज ख़त्म किया उससे उद्योगो को बहुत लाभ हुआ

2004 में UPA को बहुमत मिला और अपनी साफ़ और शानदार छवि के दम उनका नाम प्रधान मंत्री के रूप में अनुमोदित किया गया । उन्होंने वित्त मंत्री पी चितंबरम के साथ व्यापार और अर्थव्यवस्था के विकास के लिए कार्य किया। 2007 में भारत की GDP 9% पहुंच गयी और भारत दुनिया की दूसरी सबसे विकासशील अर्थव्यवस्था बन गयी। उनके नेतृत्व में राष्ट्रीय ग्रामीण स्वस्थ मिशन की शुरुआत की ,शिक्षा क्षेत्र में कार्य ,आतंकवाद को ख़त्म करने के लिए कार्य ,NIA का गठन ,भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण का गठन ,विदेशों से मजबूत रिश्ते ,भारत चीन विवाद और कश्मीर से आतंक वाद खत्म करने की  कोशिश जैसे अनेक कार्य किये। इनके शानदार कार्यो के दम पर एक बार फिर उनकी पार्टी को देश ने जनादेश दिए ,2009 में वो फिर एक बार देश के प्रधान मंत्री बने और जवाहर लाल नेहरू के बाद लगातार दूसरी बार प्रधान मंत्री बनने वाले शख्स बने।

वो पद्म विभूषण के अलावा भी अनेक पुरस्कारों से सम्मानित किये गए। वो एक महान विचारक,विद्वान्,और बुद्धिमान अर्थ शास्त्री रहे ,उन्होंने हमेशा प्रधानमंत्री के रूप में उच्च आदर्शो को प्रस्तुत किया है.उन्होंने बड़बोलेपन की बजाए अपने काम पर ध्यान दिया। उन्होंने हमेशा मर्यादाओं और गरिमाओ का विशेष ख्याल रखा ,उनके ऊपर कभी झूठ और मिथ्या भाषण के आरोप नहीं लगे। वो शांत स्वाभाव के साथ एक कर्मठ व्यक्ति का एक बड़े उदाहरण रहे ,उनके विपक्षियों ने उन्हें मौनी बाबा ,सोनिया गाँधी की स्टेम्प ,ग्वार औरत जैसे आरोप लगाए लेकिन कभी उन्होंने आप नहीं खोया ,कभी घटिया  शब्दों से उनका जवाब नहीं दिया ,कभी नैतिक मूल्यों के साथ समझौता नहीं किया ,कभी किसी  लिए ओछे और हल्के शब्दों का इस्तेमाल नहीं किया। उन्हें हमेशा शिक्षित और बुद्धिजीवी लोगो का समर्थन मिला ,इनकी कार्यशैली की पुरे विश्व में सराहना की गयी ,उन्होंने कभी भी लोगों से वोट मांगने के लिए अपनी गरीबी ,अपनी माँ के मरने ,अपनी जाति और धरम और शिक्षा आदि बातों का प्रयोग नहीं किया, किसी को भावनात्मक रूप से ब्लैक मेल नहीं किया और अपने कार्यो के बल पर हमेशा भारत को मजबूत किया और देश की एकता और अखंडता को कायम रखा फिर क्यों न कहें कि मनमोहन सिंह वाकई महान हैं 

मनमोहन सिंह के बारे में वीडियो देखें।

Loading Facebook Comments ...
No Comments

Post A Comment