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तिरंगा झंडा के बारे में कितनी जानकारी रखते हैं आप ?

तिरंगा झंडा के बारे में कितनी जानकारी रखते हैं आप ?

तिरंगा झंडा प्रत्येक भारतीय के लिए गर्व का प्रतीक होता है। जब लहराते हुए झंडे के सामने राष्ट्रीय गान गाया जाता है तो जोश से रोंगटे खड़े हो जाते हैं,बाजुओं का खून गर्म हो जाता है और शरीर का रोम रोम देशभक्ति से भर जाता है। तीन रंगो से बने इस झंडे को आम तौर से तिरंगा कहा जाता है। आजाद भारत के प्रथम प्रधानमंत्री स्वर्गीय श्री जवाहर लाल नेहरू ने कहा था “यह ना सिर्फ हमारी स्वतंत्रता का ध्वज है बल्कि सबकी आजादी का प्रतीक है “.

भारत में झंडे का इतिहास 1902 से पाया जाता है। इस ध्वज की मौजूदा स्वरुप तक पहुंचने के लिए एक लम्बा सफर तय करना पड़ा। वर्तमान स्वरुप पाने के लिए लगभग 44 वर्षों में 6 बार संशोधन किया गया। वर्तमान स्वरुप प्रथम बार २२ जुलाई 1947 में सविंधान सभा में प्रस्तुत किया गया। इसके बाद 15 अगस्त 1947 से लेकर 26 जनवरी 1950 तक राष्ट्र ध्वज को भारत के अधिराज्य के रूप में प्रस्तुत किया गया। 1950 में संविधान लागु होने पर तिरंगे को राष्ट्रीय ध्वज घोषित किया गया। राष्ट्रीय ध्वज का डिज़ाइन पिंगली वेंकैयानन्द ने किया।

राष्ट्रीय ध्वज का आकर आयताकार होता है जिसमें समान माप की तीन पट्टियाँ  ऊपर नींचे होती हैं।ध्वज की लम्बाई और चौड़ाई का अनुपात 3 :2 होता है।  ऊपर वाली पट्टी का रंग केसरिया होता है ,बीच वाली का सफ़ेद और सबसे नींचे वाली पट्टी हरे रंग की होती है। सफ़ेद वाली पट्टी के बिलकुल बीच में एक चक्र बना हुआ है जो गहरे नीले रंग का होता है। इस चक्र में 24 तिल्लियां है। ये चक्र ,अशोक चक्र के नाम से जाना जाता है क्योंकि ये चक्र अशोक की राजधानी में सारनाथ के शेर के स्तम्भ पर बना हुआ है। इस चक्र का व्यास पट्टी की चौड़ाई का 75% होता है।

ये ध्वज प्रत्येक भारतीय की आन ,बान और शान का प्रतीक तो है ही साथ ही इसके हरेक रंग का कुछ ना कुछ मतलब है। केसरिया रंग शक्ति ,साहस, शौर्य,त्याग और बलिदान को दर्शाता है जबकि सफ़ेद रंग की पट्टी शांति, सत्य, पवित्रता और सच्चाई का प्रतीक है.नीचे हरे रंग की पट्टी समृद्धि ,हरियाली और भूमि की उर्वरकता को इंगित करता है.अशोक चक्र अर्थात धर्म चक्र ,धर्म का प्रतीक है जो बताता है कि जीवन गतिशील है और रुकता मृत्यु के समान है। 24 तीलियाँ , 24 घंटे विकास और उन्नति का सन्देश देती हैं.

पहली बार 26 जनवरी 2002 में भारतीय ध्वज संहिता में संशोधन किया गया जिसमे स्वतंत्रता के कई वर्षों बाद नागरिकों को अपने घर ,कार्यालयों ,फैक्ट्री आदि स्थानों पर कभी भी, कहीं भी बिना किसी रूकावट केसम्मान सहित ध्वजारोहण करने का अधिकार मिला लेकिन इसके लिये कई कठोर कायदे और नियम बनाये गए हैं जिससे ध्वज की शान में कोई कमी ना आ पाये। ध्वज को किसी भी प्रकार से अपमानित करना अपराध माना जाता है जिसके लिए पेनल्टी या तीन साल की सजा या फिर दोनों सजाओं का प्रावधान है। इस राष्ट्रीय ध्वज के सन्दर्भ में ये बातें हमेशा याद रखनी चाहिए :

1 किसी भी दशा में फ़टे ,गंदे या क्षतिग्रस्त झंडे को नहीं फहराना चाहिए

2 झंडे पर कुछ भी बनाना या लिखना गैरकानूनी है।

3 यूनिफार्म बनाने या सजावट करने के लिए झंडे का इस्तेमाल नहीं हो सकता।

4 तिरंगा झंडा  किसी भी दशा में जमीन से टच नहीं होना चाहिए।

5 झंडा मैला हो जाने या फट जाने की अवस्था में झंडे को किसी साफ़ नदी में डालकर समाधि दे देनी चाहिए या एकांत में जलाकर नष्ट कर देना चाहिए।

6 तिरंगा हमेशा कॉटन ,सिल्क या खादी कपड़े का बना होना चाहिए ना कि प्लास्टिक जैसे किसी पदार्थ का।

7 किसी शहीद के शव को ढकने के बाद उस झंडे को गोपनीय तरिके से जलाकर नष्ट कर देना चाहिए।

8 तिरंगे को किसी बिल्डिंग या किसी अन्य सामान को ढकने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता और नाहि किसी कार ,बोट या प्लेन पर लगाना चाहिए।

9 किसी भी दूसरे झंडे को राष्ट्रीय ध्वज से ना ऊंचा लगा सकते हैं  और ना ही बराबर में रख सकते हैं । अगर राष्ट्रीय ध्वज के साथ कतार  में कोई अन्य ध्वज लगाना हो उसे तिरंगे के बायीं तरफ लगाना चाहिए।

10 “हुबली ” भारत का एकमात्र लाइसेंस प्राप्त संस्थान है जो तिरंगा झंडा बनाने और सप्लाई का काम करता  है ,ये संसथान बेंगलुरु से 420 किमी दूर है।

11 झंडे को सिर्फ शोक के समय ही आधा झुकाया जा सकता है अन्य किसी स्थिति में नहीं।

12 भारत का सबसे बड़ा झंडा झारखंड की राजधानी रांची में 23 जनवरी 2016 को फहराया गया उसकी ऊंचाई 493 फ़ीट है जबकि लम्बाई और चौड़ाई 99 x 66 फ़ीट है।

13 22 जुलाई 1947  तक तिरंगे में चक्र के स्थान पर चरखा बना हुआ था। जिसे 1931 में अपनाया गया था।

14 ध्वज फहराते समय केसरिया रंग वाली पट्टी ऊपर होनी चाहिए और हरे रंग वाली पट्टी नीचे।

15 ये एक रोचक तथ्य है कि इस ध्वज को तिरंगा बोला जाता है जबकि उसमे चार रंग इस्तेमाल होते हैं केसरिया ,सफेद ,हरा और गहरा नीला।

16 ध्वजारोहण का सही समय सूर्योदय से सूर्यास्त तक होता है।

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