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गुजरात में कैसे हुआ “नीच” प्रचार

गुजरात में कैसे हुआ “नीच “प्रचार 

गुजरात के चुनाव का बहुप्रतीक्षित नतीजा आ चूका है। भाजपा ने 99 सीटें जीतकर जहाँ अपनी सरकार बचाई वहीँ अपनी शाख भी बचने में कामयाब रही। कांग्रेस ने भी 80 सीटें जीतकर एक सम्मानित विपक्ष की स्थिति प्राप्त की। चुनाव प्रचार के दौरान दोनों पार्टियों ने एक दूसरे पर खूब शब्दों के बाण चलाये। चुनाव का नतीजा कुछ भी क्यों ना हो लेकिन इस चुनाव प्रचार में कई मर्यादाये टूटी,कई गरिमाएँ भंग हुई और प्रचार का स्तर इतना नीचे गिरा कि नीचता की हदें भी पार हो गयी।

कांग्रेस ने कुछ आंदोलनकारी युवाओं को अपने पक्ष में करके उन्हें जात पात के नाम पर अपने पक्ष में लामबंद करने की कोशिश की ,जनता को आरक्षण का लालच दिया ,कर्ज माफ़ी का वादा किया लेकिन साथ ही साथ गुजरात के स्थानीय मुद्दे भी उठाये। राहुल गाँधी ने लगातार किसानों की बात की ,बेरोजगारों की बात की ,व्यापारियों की बात की ,गरीबों की बात की ,महिलाओँ की बात की और पुरे प्रचार के दौरान अपनी बॉडी लैंग्वेज और शब्दों को कण्ट्रोल में रखा और व्यव्हार में सादगी बनाये रखी।

कांग्रेस के मणिशंकर ऐय्यर ने मोदी जी के लिए नीच शब्द का इस्तेमाल किया जो वाकई बहुत निंदनीय था। कांग्रेस ने अइय्यर पर कार्यवाही करते हुए उससे माफ़ी मंगवाई और पार्टी से बर्खास्त कर दिया लेकिन हद तो जब हो गयी जब भाजपा ने दर्जनों सभाओं में और टीवी डिबेट में बार बार ये कहकर राजनैतिक लाभ लेने की कोशिश की कांग्रेस ने मोदी जी को नीच बोला है ,मोदीजी ने और एक कदम आगे बढ़कर ये तक कह दिया कि मुझे नीच जाति का बोला गया है।

भाजपा ने दशकों पहले मर चुके नेहरू और इंदिरा की भी आलोचना से भी परहेज नहीं किया ।

दस साल तक देश के प्रधान मंत्री रहे और अपने शानदार रिकार्ड के लिए याद किये जाने वाले मन मोहन सिंह देशभक्ति पर ही सवाल उठा दिया।

पाकिस्तान के नाम का सहारा लेकर कांग्रेस को पाकिस्तान परस्त सिद्ध करने की कोशिश की गयी जिसपर पाकिस्तान ने भाजपा को नसीहत दी कि भारत को पाकिस्तान को बीच में घसीटने के बजाये अपने दम पर चुनाव लड़ना चाहिए।

भाजपा ने हार्दिक पटेल की सीडी का उपयोग तक चुनाव में किया।

उस बुलेट ट्रेन का जमकर विज्ञापन किया जिसके चलने की अभी कोई उम्मीद नहीं है।

विदेशी एजेंसियों से फर्जी रेटिंग दिलवाकर माहौल बनाने की कोशिश की।

शंकर सिंह बघेला और कई अन्य विधायकों को तोड़कर अपनी पार्टी में शामिल करवाया।

मोदी जी ने कई बार खुद को गुजरात का बेटा बताकर इमोशनल कार्ड खेला।

औरंगजेब और बाबर का नाम लेकर चुनाव को साम्प्रदायिक करने की कोशिश की।

भाजपा पर ये भी आरोप है कि उसने चुनाव आयोग पर दबाव बनाया और तारीखें अपने हिसाब से रखवाई।

व्यापारियों को खुश करने के लिए एनवक्त पर G S T के टैक्स दर बदलाव किया।

ये भी जगजाहिर है कि अधिकतर मीडिया चैनल भाजपा समर्थित हैं जिनसे भाजपा ने अपने पक्ष में लहर बनाई।

चुनाव जीतने के लिए भाजपा ने 13 राज्यों के मुख्य मंत्री ,60 केंद्रीय मंत्री ,100 संसद और 250 विधायकों की फौज को गुजरात में झोंक दिया।

शीत कालीन सत्र को चुनाव के लिए लेट कर दिया गया और मोदी जी देश को भूल कर फुल टाइम चुनाव प्रचार में लगे रहे।

हद तो जब हो गयी जब मोदी  जी ने पाकिस्तान से भाड़े पर लिए सी प्लेन में चढ़कर फोटो खिचवाकर देश में विकास का ढोल बजा दिया।

भले ही भाजपा ने चुनाव जीतने के लिए ओछे हथकंडो का सहारा लिया और उनमें मोदीजी भी शरीक हुए लेकिन 182 सीटों में 99 सीटें जीतने पर मोदी जी को बहुत बहुत बधाई।

 

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