webduniyahindi | एकादशी के दिन करेंगे ये काम ,स्वर्ग लोक में स्थित पितृ होंगे तृप्त
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एकादशी के दिन करेंगे ये काम ,स्वर्ग लोक में स्थित पितृ होंगे तृप्त

एकादशी के दिन करेंगे ये काम ,स्वर्ग लोक में स्थित पितृ होंगे तृप्त

एकादशी के दिन करेंगे ये काम ,स्वर्ग लोक में स्थित पितृ होंगे तृप्त

 

एकादशी व्रत में तुलसी पूजा का विशेष महत्व है। इस व्रत में तुलसी एवं तुलसी मंजरी से भगवान् का पूजन करना अति उत्तम माना जाता है। भगवान् को तुलसी अति प्रिय है इसलिए वे हीरे ,मोती आदि से पूजित किये जाने पर भी इतने प्रसन्न नहीं होते जितने तुलसी के एक पत्ते से। तुलसी मंजरी के किये गए पूजन से जीव के जन्म जन्मांतरों के पाप मिट जाते हैं।

तुलसी सौभाग्यदायक और एवं विपत्तिनाशक होती है। शास्त्रानुसार जैसे गंगा कोई साधारण नदी नहीं सर्वश्रेष्ठ तीर्थ है। वैसे ही तुलसी कोई पौधा नहीं ,बल्कि भगवान् के साक्षात् दर्शन हैं तुलसी का पौधा लगाना अति शुभदायक होता है तथा प्रत्येक कर्मकाण्ड में तुलसी का होना उत्तम माना जाता है।

एकादशी के दिन करेंगे ये काम ,स्वर्ग लोक में स्थित पितृ होंगे तृप्त

एकादशी के दिन करेंगे ये काम ,स्वर्ग लोक में स्थित पितृ होंगे तृप्त

जिस स्थान पर तुलसी का पौधा होता है उस स्थान पर ब्रह्मा ,विष्णु तथा समस्त देवी देवताओका वास माना जाता है। इसी कारण तुलसी पूजन करने से सभी देवो को पूजने का फल प्राप्त होता है।

पद्मपुराण के अनुसार तुलसी की महिमा अपार है। इसके दर्शन करने मात्र से ही जिव के सभी प्रकार के पाप मिट जाते हैं। तुलसी को स्पर्श करने से शरीर पवित्र हो जाता है। प्रणाम करने से रोगों का निवारण होता है। पौधे को सींचने से यह यमराज के भय को मिटाती है। तथा तुलसी रोपित करने पर प्रभु के समीप ले जाती है।

रात्रि जागरण की महिमा :-

जो व्यक्ति एकादशी के दिन मंदिर जाकर नियमित रूप से प्रातः और शाम दीपदान करता है उसके पुण्यफल की गिनती चित्रगुप्त भी नहीं कर  सकते। भगवान् श्रीकृष्ण के सामने जो लोग दीपक जलते हैं, उनके पितृ स्वर्गलोक में स्थित होकर अमृतपान से तृप्त होते हैं। इस दिन गाय के घी या तिल के तेल से दीप दान करना चाहिए। रात्रि को जागरण करने वाले भक्त प्रभु को अति प्रिय होते हैं।

 

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