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पुलवामा पर गंदी राजनीति

जम्मू कश्मीर के पुलवामा में अवंतीपोरा के  लेथपोरा इलाके में आतंकवादियों ने 60 किलो आरडीएक्स से भरी हुई कार में  विस्फोट करके सीआरपीएफ के कम से कम 42 सैनिकों को मौत की नींद सुला दिया है,पूरे देश में गुस्से की लहर दौड़ गई, देशवासियों में भावनाओं में गुस्से का ज्वार  उमडने लगा,पूरा देश और देश की सभी पार्टियां अपने निजी मतभेद भूलकर एक साथ खड़ी हो गई, सारी पार्टियों ने आश्वासन दिया की हम हर प्रकार से सरकार के साथ हैं.

  लेकिन हमले  के 72 घंटे भी नहीं हो पाए थे की राजनीतिक पार्टियों ने  अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया अपनी औकात दिखानी शुरू कर दी. देश अभी सदमे से निकल भी नहीं पाया था कि सब पार्टियों ने इस हमले की जिम्मेदारी दूसरी पार्टियों  पर डालनी शुरू कर दी, धीरे धीरे एक दूसरे के ऊपर ऐसे कीचड़ फेंके जाने लगी जिससे भारतीयता और देशभक्ति भी शर्मसार हो जाए, इन बयानों ने शहीदों की चिताओं को ठंडा तक नहीं होने दिया  और डर्टी पॉलिटिक्स का पहाड़ खड़ा कर दिया तो आइए आपको बताते हैं की पार्टियों और उनके समर्थकों ने कैसे कैसे बयान दिए और सोशल मीडिया पर शहीदों की मौत का कैसे राजनीतिकरण कर किया,सोशल मीडिया पर  घटिया मैसेज की बाढ़ आ गई

            सबसे पहले भाजपा का बयान आया जिसमें कहा गया की पुलवामा  हमले के लिए जवाहरलाल नेहरू जिम्मेदार हैं अगर वह ऐसे बीज ना बोते  तो आज ऐसे हमले ना होते.

      इसके बाद कुछ लोगों ने शंका जाहिर की के एक साथ  2500 सैनिक ,70 गाड़ियां का जखीरा 200 किलो आरडीएक्स और चुनावी मौसम, इस बयान में यह कहने की कोशिश की गई है कि कहीं इस हमले के पीछे सरकार का ही तो हाथ नहीं था

            कुछ लोगों का मानना है कि अगर महात्मा गांधी की जगह नरेंद्र मोदी होते तो आज पाकिस्तान पैदा ही नहीं होता इस बयान को किम जोन के नाम से लिखा गया है.

        एक साहब लिखते हैं कि 5 साल सिर्फ कांग्रेस और गांधी परिवार को कोसने में लगा दिए और दुश्मन ने मौका देख कर हमला कर दिया ,मतलब  हमले के लिए सरकार को जिम्मेदार बताया गया है

       नवजोत सिंह सिद्धू का एक बयान आया जिसमें उन्होंने कहा कि आतंकवाद की कोई जाति नहीं होती धर्म नहीं होता कोई देश नहीं होता, इस पर कुछ लोगों ने सिद्धू को गद्दार बता कर कपिल शर्मा के शो से बाहर करने की वकालत की है

            किसी ने गंदे शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा है कि आसिफा  का रेप हुआ तब बॉलीवुड की कई———– 2, 2 फिट की मोमबत्ती लेकर निकल पड़ी थी आज  वह सब कहां है

             एक मैसेज में बताया गया है कि जब हमला हुआ तो मोदी जी उत्तराखंड में ,अमित शाह कर्नाटक में,आदित्यनाथ योगी केरल में चुनावी रैली कर रहे थे. मनोज तिवारी वैलेंटाइन डे का जश्न मना रहे थे असलियत में इतने बड़े हमले के बाद भी भाजपा के बड़े नेताओं का राजनीतिक कार्यक्रम करना हंसी ठिठोली करना लोगों को बिल्कुल भी पसंद नहीं आया है.

           भाजपा के सांसद नेपाल सिंह ने भी शर्मनाक बयान दिया  की फौजी तो होते ही मरने के लिए हैं, वह तनख्वाह किस बात की लेते हैं .किस देश में सैनिक जान नहीं देते ,उन्हें भी लोगों ने सोशल मीडिया पर बहुत  ट्रोल किया है

           किसी ने श्री मोदी को कहा है कि आज राष्ट्रीय शोक होना चाहिए था आज के दिन ही मोदी रेल का उद्घाटन कर रहे हैं

         कुछ लोगों ने  प्रधानमंत्री के सऊदी अरब के प्रिंस के साथ प्रोटोकोल तोड़कर गले मिल ने और उसकी दावत करने की निंदा की है/

         एक बयान में मोदी के समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा गया है कि भक्तों को 70 साल पहले के नेहरू के कार्य याद है लेकिन मात्र 20 साल पहले अटल का कंधार में आतंकियों को छोड़ना याद क्यों नहीं है

            कुछ भाजपा नेताओं की वह फोटो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो गई है जिस ने एक शहीद  के शव के सामने कुछ भाजपा नेता बैठे हुए हंसी मजाक कर रहे हैं जिनमें आदित्यनाथ योगी भी हैं

            किसी ने मोदी जी पर कटाक्ष करते हुए लिखा है की फेसबुक में हम सब पाकिस्तान को बर्बाद कर रहे हैं जिसको करना चाहिए वह चुनाव की तैयारी में मस्त है

             कई ऐसी वीडियो दुबारा नजरों के सामने आ रही हैं जिनमें मोदी जी प्रधानमंत्री बनने से पहले अपने इंटरव्यू में कह रहे हैं कि सरकार को यह लव लेटर लिखने बंद करने चाहिए, पाकिस्तान को उसी की भाषा में जवाब देना चाहिए और अमेरिका जाने की बजाएं पाकिस्तान में जाना चाहिए. उनकी वीडियो भी वायरल हो रही है जिसमें वह तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से सवाल पर सवाल पूछ रहे हैं कि देश के अंदर आतंकवादी कैसे पहुंचे है हथियार कैसे आए विस्फोटक कैसे आए जबकि सब कुछ सरकार के हाथ में है.

            यह मैसेज पढ़िए जिसमें कहा गया है कि आजादी से आज तक बीजेपी या आर एस एस का कोई भी शहीद नहीं हुआ फिर भी यह लोग देश भक्ति का सर्टिफिकेट क्यों  बांटते हैं.

           किसी ने योगी के ऊपर कटाक्ष किया है कि उन्होंने कुंभ मेले पर 4000 करोड़ खर्च कर दिए लेकिन उत्तर प्रदेश के 12 शहीदों के लिए उनके पास 12 करोड भी नहीं है .

           एक मैसेज में मुस्लिमों को आतंकवादी बताने वाले लोगों को जवाब दिया गया है पुलवामा में जिस एसयूवी से सीआरपीएफ की गाड़ी पर हमला किया गया वह किसी कश्मीरी पंडित की गाड़ी निकली

            मोदी जी पर एक और हमला किया गया और पाकिस्तानियों को गाली देते हुए कहा गया कि सालों  पाकिस्तानियों तुम ने भारत को समझ क्या रखा है बस हमारे प्रधानमंत्री को उद्घाटन और प्रचार से फ्री हो जाने दो.

             एक नेता बोल रहे हैं इस समय जवानों की मौत से देश में राष्ट्रवाद की लहर चल रही है  बस इस राष्ट्रवाद को वोटों में बदलना है यह भी काफी शर्मनाक बयान है

           किसी ने गुजरात मॉडल  पर व्यंग किया है कि 42 शहीद जवानों में यह एक भी गुजराती नहीं है  मगर पैसे लेकर भागने वालों में सारे गुजराती हैं

            अभी एक खबर आई थी कि केंद्र सरकार ने आरबीआई से 28000 करोड़ का फंड निजी फायदे के लिए ले लिया है उसके ऊपर भी ताना मारा गया है

          एक साहब ने तो यह बोल दिया की सैनिक बच्चा होने के बाद पंजाब बॉर्डर पर मिठाइयां बांटते हैं जब कि पूरे 1 साल से घर नहीं आए थे, अगर बयान में सच्चाई है तो इससे घटिया बयान कुछ नहीं हो सकता

दोस्तों यह बहुत दुखद है कि ऐसे बुरे वक्त में भी हम एक दूसरे के ऊपर कीचड़ फेंकने से बाज नहीं आ रहे हैं जबकि यह वक्त था एक साथ खड़े होने का, अपना भाईचारा दिखाने का, दुश्मनों को मुंह तोड़ जवाब देने का. अगर हम आपस में ही लड़ते रहेंगे तो देश मजबूत कैसे होगा

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